आज के शोर-शराबे और अत्यधिक वीएफएक्स (VFX) से भरी मसाला फिल्मों के दौर में, ‘हनुमान अंश’ (Hanuman Ansh – 2026) एक ऐसी फिल्म बनकर उभरी है जो सीधे आत्मा को छूती है और मन को असीम शांति देती है। निर्देशक विशाल चतुर्वेदी द्वारा निर्देशित यह एक आध्यात्मिक व भक्ति ड्रामा फिल्म है, जो विश्व-विख्यात संत नीम करोली बाबा (महाराज जी) के प्रारंभिक जीवन, उनकी कठोर तपस्या और असीम कृपा पर आधारित है।
यह केवल चमत्कारों को दिखाने वाली कोई पारंपरिक बायोपिक नहीं है, बल्कि यह कहानी है प्रेम, त्याग, निष्काम सेवा और हनुमान जी के प्रति अनन्य भक्ति की। आइए जानते हैं इस फिल्म की संपूर्ण समीक्षा, कहानी के अनछुए पहलू, कलाकारों का अभिनय और हमारा अंतिम फैसला।
📋 ‘हनुमान अंश’ फिल्म विवरण (Quick Facts)
- 🎬 फिल्म का नाम: हनुमान अंश (Hanuman Ansh)
- 📅 रिलीज की तारीख: 7 अगस्त 2026
- 🎥 लेखक एवं निर्देशक: विशाल चतुर्वेदी (उनकी प्रसिद्ध पुस्तक ‘डिवाइन डिटूर’ पर आधारित)
- 🌟 मुख्य कलाकार: चंदन आनंद, शोभिनव सत्या, विहान शेडगे, पूर्णिमा तिवारी, अनिल के. रस्तोगी, निखिल दुबे
- 🎼 संगीत: साधु एस. तिवारी, ऋषि पाठक
- 🎭 शैली (Genre): आध्यात्मिक / भक्ति ड्रामा / बायोपिक
- ⏱️ अवधि (Runtime): 2 घंटे 14 मिनट
- ⭐ रेटिंग: 4.5 / 5 स्टार्स
📖 ‘हनुमान अंश’ की कहानी: लक्ष्मी नारायण से नीम करोली बाबा बनने की दिव्य यात्रा
फिल्म की कथा उत्तर प्रदेश के अकबरपुर गांव में जन्मे एक साधारण ब्राह्मण बालक लक्ष्मी नारायण शर्मा से प्रारंभ होती है। बाल्यकाल से ही सांसारिक सुख-सुविधाओं और मोह-माया से विरक्त रहने वाले लक्ष्मी नारायण का जीवन तीन प्रमुख अध्यायों में दर्शाया गया है:
1. बाल्यकाल में गृह-त्याग और वैराग्य
किशोरावस्था में ही सांसारिक बंधनों को त्यागकर लक्ष्मी नारायण ईश्वर की खोज में निकल पड़ते हैं। जंगलों, नदी के तटों और वीरान गुफाओं में वर्षों तक कठोर साधना करते हुए, वे प्रभु श्री हनुमान जी की अनन्य भक्ति में लीन हो जाते हैं। फिल्म में उनके आत्म-साक्षात्कार के इस कठिन सफर को बहुत ही सादगी और गंभीरता से प्रस्तुत किया गया है।
2. ‘नीब करोरी’ रेलवे स्टेशन की ऐतिहासिक घटना
फिल्म का सबसे भावुक और प्रसिद्ध दृश्य वह है जब ब्रिटिश काल में एक टिकट चेकर (TTE) एक युवा साधु को बिना टिकट यात्रा करने के कारण उत्तर प्रदेश के नीब करोरी (Neeb Karori) नामक छोटे से स्टेशन पर जबरन उतार देता है। परंतु इसके बाद जो हुआ, उसने सबको स्तब्ध कर दिया—ट्रेन का भारी-भरकम स्टीम इंजन लाख कोशिशों के बाद भी एक इंच आगे नहीं हिला! जब रेलवे अधिकारियों को उस युवा साधु के दिव्य तेज का भान हुआ, तो उन्होंने हाथ जोड़कर उनसे पुनः ट्रेन में बैठने की प्रार्थना की। जैसे ही बाबा जी ने ट्रेन में कदम रखा, ट्रेन सीटी बजाते हुए दौड़ पड़ी। इसी पावन स्थल से उनका नाम ‘नीम करोली बाबा’ पड़ा।
3. “हनुमान अंश” नाम की वास्तविक भावना
निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने स्पष्ट किया है कि महाराज जी ने कभी स्वयं को भगवान घोषित नहीं किया। परंतु उनके भीतर का अथाह प्रेम, बिना किसी भेदभाव के सबको भोजन कराना (भंडारा), और दुखियों के कष्ट हरने की अपार शक्ति देखकर भक्तों को उनमें साक्षात पवनपुत्र श्री हनुमान जी का अंश दिखाई देता था। यही निष्काम भाव इस फिल्म की मूल आत्मा है।
🌟 कलाकारों का अभिनय: चंदन आनंद की जीवन-सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुति
- चंदन आनंद (महाराज जी के रूप में): चंदन आनंद ने अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ अभिनय किया है। बिना भारी-भरकम संवादों के, केवल अपनी शांत मुस्कान, करुणामयी आंखों और कंबल ओढ़ने की सादगी से उन्होंने पर्दे पर साक्षात महाराज जी की उपस्थिति का अनुभव करा दिया है।
- विहान शेडगे और शोभिनव सत्या (युवा लक्ष्मी नारायण): युवा अवस्था के लक्ष्मी नारायण के रूप में दोनों कलाकारों ने वैराग्य, सरलता और ईश्वर के प्रति अटूट निष्ठा को बड़ी ही खूबसूरती से निभाया है।
- अनिल के. रस्तोगी एवं पूर्णिमा तिवारी: सहयोगी कलाकारों ने 20वीं सदी के ग्रामीण भारत के परिवेश और पारिवारिक भावनाओं को पूरी प्रामाणिकता के साथ जीवंत किया है।
🎨 निर्देशन, छायांकन और मनमोहक संगीत
विशाल चतुर्वेदी का संवेदनशील निर्देशन
अपनी चर्चित पुस्तक ‘डिवाइन डिटूर’ (Divine Detour) पर आधारित इस फिल्म में निर्देशक ने किसी भी प्रकार के बनावटी या तड़क-भड़क वाले वीएफएक्स का सहारा नहीं लिया। चमत्कारों को अतिशयोक्ति के बजाय बहुत ही शांत, शालीन और आदरपूर्ण ढंग से दिखाया गया है, जो दर्शकों के हृदय में गहरी श्रद्धा जगाता है।
रूह को सुकून देने वाला संगीत
साधु एस. तिवारी और ऋषि पाठक द्वारा तैयार किया गया शास्त्रीय संगीत और भक्तिमय मंत्रोच्चार थिएटर से बाहर आने के बाद भी कानों में गूंजते रहते हैं। पृष्ठभूमि संगीत (BGM) हर दृश्य के आध्यात्मिक प्रभाव को कई गुना बढ़ा देता है।
🌍 आज की युवा पीढ़ी (Gen Z) के लिए यह फिल्म क्यों जरूरी है?
उत्तराखंड के कैंची धाम (Kainchi Dham) वाले नीम करोली बाबा वही संत हैं, जिनके आशीर्वाद से स्टीव जॉब्स (Apple), मार्क जुकरबर्ग (Facebook) और विराट कोहली जैसी वैश्विक हस्तियों ने अपने जीवन के सबसे कठिन दौर में नई दिशा और मानसिक शांति पाई थी। आज के डिप्रेशन, तनाव और डिजिटल भटकाव के युग में यह फिल्म बाबा जी के 4 मूल मंत्रों को सिखाती है:
“सबको प्रेम करो, सबको भोजन कराओ, ईश्वर का स्मरण करो और सदा सत्य बोलो।”
✅ फिल्म की मजबूत कड़ियां (सकारात्मक पहलू):
- सच्ची, प्रामाणिक और भावुक कर देने वाली कथा।
- चंदन आनंद का शांत और प्रभावशाली अभिनय।
- बिना किसी फालतू ड्रामे के शुद्ध आध्यात्मिक माहौल।
- मन को शांति प्रदान करने वाला पावन संगीत।
❌ फिल्म की कुछ सीमाएं:
- मध्यांतर (Interval) के बाद कहानी की गति थोड़ी धीमी और ध्यानमग्न है।
- सीमित सिनेमाघरों में रिलीज होने के कारण टिकट मिलने में कठिनाई।
अंतिम निष्कर्ष (Final Verdict): यदि आप सिनेमा में कुछ ऐसा देखना चाहते हैं जो आपके अशांत मन को असीम शांति, भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा से भर दे, तो ‘हनुमान अंश’ एक ऐसी उत्कृष्ट फिल्म है जिसे आपको सपरिवार अवश्य देखना चाहिए।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रश्न (FAQs)
1. क्या ‘हनुमान अंश’ फिल्म नीम करोली बाबा की सच्ची कहानी पर आधारित है?
हाँ, यह फिल्म नीम करोली बाबा (लक्ष्मी नारायण शर्मा) के प्रारंभिक जीवन, उनकी तपस्या और नीब करोरी के ऐतिहासिक ट्रेन चमत्कार पर पूरी तरह से आधारित है, जिसे विशाल चतुर्वेदी की पुस्तक ‘डिवाइन डिटूर’ से लिया गया है।
2. ‘हनुमान अंश’ फिल्म में नीम करोली बाबा का किरदार किसने निभाया है?
फिल्म में मुख्य रूप से वरिष्ठ अभिनेता चंदन आनंद ने नीम करोली बाबा का अविस्मरणीय किरदार निभाया है, जबकि उनके युवा स्वरूप को विहान शेडगे और शोभिनव सत्या ने जीवंत किया है।
3. क्या इस फिल्म का अगला भाग (सीक्वल) भी आएगा?
जी हाँ, निर्देशक विशाल चतुर्वेदी के अनुसार यह एक 3-भागों वाली आध्यात्मिक त्रयी (Spiritual Trilogy) का पहला भाग है। अगले भागों में कैंची धाम आश्रम की स्थापना और बाबा जी के वैश्विक प्रभाव की कहानी दिखाई जाएगी।
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